Swami Vivekanand Ji Prerak Prasang In Hindi

 स्वामी विवेकानंद जी का प्रेरक प्रसंग 

एक बार की बात है एक बार स्वामी विवेकानंद जी अपने मित्र के घर पर थे यह बात उस वक्त की है जब वह अपने बचपन के समय में थे और अपने मित्र के पास खेलने जाया करते हैं 
Swami Vivekanand Ji Prerk Prasang In Hindi
और उनकी आदत थी कि वह एक पेड़ के साथ खेलते थे उसकी डाली के ऊपर लटक लटक कर आनंद लिया करते थे एक दिन मित्रके दादाजी ने कहा नरेंद्र आगे से तुम इस पेड़ पर इस तरह से कभी मत लटकना नरेंद्र जिज्ञासु प्रवृत्ति के थे {मैं आपको यहां पर एक बात बता दूं स्वामी विवेकानंद जी का बचपन का नाम नरेंद्र है }

उन्होंने दादा जी से पूछा कि आखिर ऐसा क्यों है ???

आप मुझे इस तरह से मना क्यों कर रहे हो मित्र के दादाजी ने जवाब दिया कि पेड़ पर एक भयानक देत्य रहता  है इसलिए तुम्हारे लिए यहां पर खतरा है नरेंद्र ने फिर पूछा उससे हमें क्या दिक्कत है मित्र के दादाजी ने कहा कि उसको किसी का भी पेड़ के साथ खेलना पसंद नहीं है 

स्वामी विवेकानंद जी की निडरता 

अगर हम इस तरह की गलती करेंगे तो वह हमारी गर्दन तोड़ देगा यह सुनकर नरेंद्र कुछ देर तक सोच विचार करते रहे स्वामी विवेकानंद जी वापस खेल का आनंद लेने लगे पेड़ की डाली पर 

इतने में उनका मित्र बोला अरे नरेन्द्र शायद तुम भूल गये हो की दादाजी ने हमसे क्या कहा था 
वो बोले हां हा यही कहा था की डाली के साथ खेलेंगे तो डाली टूट जाएगी 

स्वामी विवेकानंद जी ने अपने मित्र से कहा कि मित्र तुम कितने भोले हो अगर पेड़ पर चढ़ने से मेरी गर्दन टूटती तो शायद कब की टूट चुकी होती किसी ने कहा और तुमने मान लिया 

स्वामी विवेकानंद जी की सोच 

जब तक किसी चीज को अपनी आंखों से ना देखो और खुद के साथ ऐसा ना हो तब तक हमें कभी भी ऐसी चीजों के ऊपर विश्वास नहीं करना चाहिए स्वामी विवेकानंद जी बचपन से ही जिज्ञासु प्रवृत्ति के थे और निडर भी थे  और उनकी निडरता  का प्रमाण ये प्रेरक प्रसंग देता है

अगर आपके पास भी ऐसी ही प्रेरक प्रसंग हो तो आप हमे भेज सकते है हम उसे आपके नाम के साथ यहाँ पर प्रकाशित करेंगे 
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Swami Vivekanand Ji Prerak Prasang In Hindi Swami Vivekanand Ji Prerak Prasang In Hindi Reviewed by Motivational Keeda on October 02, 2020 Rating: 5

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