डर के आगे जीत है bhula de dar kuch alag kar


डर  के आगे जीत है bhula de dar kuch alag kar 

डर  के आगे जीत है bhula de dar kuch alag kar
डर  के आगे जीत है bhula de dar kuch alag kar

नमस्कार दोस्तों आप सभी का स्वागत है
आज मैं आपको वापस एक नई कहानी सुनाता हूं और
 यह कहानी है एक युवा नौजवान की जिसकी नोकरी  की वजह से
 किसी गांव में उसकी पोस्टिंग हुई और वह गांव में अच्छा खासा रह रहा था
 लेकिन एक दिन गांव वालों ने कहा कि आपको यहां रहते हुए हम आपको
एक सलाह देना चाहते हैं कि वह गुफा है आप कभी उस गुफा में ना जाएं
 क्योंकि जो भी उस गुफा में गया है वह आज  दिन तक लौट के वापस नहीं आया है

उसके दिमाग में ख्याल आया कि ऐसा क्या है उस गुफा में कि लोग वापस
नहीं आए तो उसने काफी विचार-विमर्श किया अपने आप से
और 1 दिन  डिसाइड किया कि मैं गुफा में जरूर जाऊंगा तो संडे का दिन
उसने डिसाइड किया और वहां से चला गया

  तो गांव वालों ने  उसको वहां पर छोड़ दिया और
 वह गुफा में प्रवेश कर गया तीन लोग आए तो उसने पूछा कि आप यहां जीवित है
गाँव वालों ने बताया कि जो गुफा में जाते है वह वापस नहीं आते
गुफा वालो ने कहा कि अगर हम यहां से जाते तो हमें इतनी
सुख सुविधाएं नहीं मिलती यहां पर सब कुछ सुविधाएं हैं जो गांव में नहीं है
 इसलिए यहीं रुक गए

दोस्तों यह कहानी सिखाती है कि

 या तो आप वो करिए जो आप करना चाहते हो 

या वह करिए जो दुनिया आपसे करवाना चाहती है

मैंने कहानी लिखी थी कुएं का मेंढक

लोगों की सोच उतनी  होती है जितना उनका दायरा होता है 

आप क्या सोचते हैं इससे पता लगता है कि आपकी सोच क्या है

उम्मीद है कि यह कहानी आपको अच्छी लगी होगी फाइनली
आपका कीमती समय देने के लिए दिल से
शुक्रिया
डर के आगे जीत है bhula de dar kuch alag kar डर  के आगे जीत है bhula de dar kuch alag kar Reviewed by Admin on February 18, 2020 Rating: 5

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